Sunday, 9 December 2012

HISTORY OF INDIA TRICLOR


HISTORY OF INDIA TRICLOR

दास्तान-ए-सफ़र तिरंगा
समयः 7 अगस्त, 1906
स्थानः पारसी बगन स्क्वेयर, कोलकाता
बतौर राष्ट्रीय ध्वज, इसे सर्वप्रथम फहराया गया!
समयः 22 अगस्त, 1907
स्थानः
 स्टटगार्ट, दक्षिणी जर्मनी
'सप्तऋषि ध्वज', जिसे अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी अधिवेशन में फहराया गया!
समयः 7 अगस्त, 1906
स्थानः कांग्रेस सत्र, कोलकाता
तब होम रूल मूवमेंट जोरों पर था। कांग्रेस सत्र के दौरान यह फहराया गया।

समयः 1921
आंध्र प्रदेश के एक युवक ने यह झंडा गांधी जी को भेंट किया,
उनकी सलाह-सहमति के लिए। उन्होंने इसमें सफेद पट्टी और चरखा शामिल करने की सलाह दी।
समयः 1931
अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के एक सत्र के दौरान यह सुझाया गया।
हालांकि, इसे बतौर राष्ट्रीय ध्वज 'एप्रूवल' नहीं मिला।

समयः 6 अगस्त, 1931
...... तो यह है वह ध्वज, जिसे कांग्रेस ने सर्वसम्मति से औपचारिक तौर पर अपनाया।
इसे सर्वप्रथम 31 अगस्त को फहराया गया।

समयः 22 जुलाई, 1947
संपूर्ण राष्ट्रीय घ्वजः तिरंगा
काउंसिल हाउस में इसे सर्वप्रथम 15 अगस्त 1947 को फहराया गया।
स्वर्गीय श्रीपिंगाली वैंकेयाजिन्होंने राष्ट्रीय ध्वज के लिए तीन रंगों और चक्र को आकार-प्रकार दिया और बनाया तिरंगा
तिरंगायानी
केसरिया- साहस, त्याग, देशभक्ति और वैराग्य का प्रतीक
सफेद- शांति और एकता का प्रतीक
गहरा हरा- आस्था और समृद्धि का प्रतीक
बीचोंबीच मौजूद अशोक चक्र प्रतीक है राष्ट्र की सनातन प्रगति और न्याय के महत्व का


अति विशिष्ट और विशिष्ट लोगों की हत्याएं (Murders) : एक नज़र

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर की मंगलवार को उनके ही सुरक्षाकर्मी ने हत्या कर दी। हमलावर सुरक्षाकर्मी मुमताज हुसैन कादरी ने गवर्नर सलमान तासीर के काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें उनकी मौत हो गई।
सुरक्षाकर्मी द्वारा अति विशिष्ट और विशिष्ट लोगों की हत्या करने का यह पहला मामला नहीं था। इससे पहले भी अन्य देशों मसलन बंगलादेश, नेपाल भारत और पाकिस्तान में ऐसे कई मामले सामने आए है।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर की मंगलवार को उनके ही सुरक्षाकर्मी ने हत्या कर दी। हमलावर सुरक्षाकर्मी मुमताज हुसैन कादरी ने गवर्नर सलमान तासीर के काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें उनकी मौत हो गई।
सुरक्षाकर्मी द्वारा अति विशिष्ट और विशिष्ट लोगों की हत्या करने का यह पहला मामला नहीं था। इससे पहले भी अन्य देशों मसलन बंगलादेश, नेपाल भारत और पाकिस्तान में ऐसे कई मामले सामने आए है।

आइए नज़र डालें ऐसे ही कुछ हाई प्रोफाइल मर्डर केसेस पर....

महात्मा गांधी (जनवरी 30,1948)
30 जनवरी, 1948, गांधी की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई जब वे नई दिल्ली के बिड़ला भवन (बिरला हाउस) के मैदान में चहलकदमी कर रहे थे। गांधी जी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की थी। गांधी का हत्यारा नाथूराम गौड़से उन्हें पाकिस्तान को भुगतान करने के मुद्दे को लेकर भारत को कमजोर बनाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था।गोड़से को 15 नवंबर 1949 को फांसी दे दी गई।

इंदिरा गांधी अक्टूबर (31, 1984)
भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही सुरक्षाकर्मियों सतवंत सिंह और बेयंत सिंह ने की थी। इंदिरा की हत्या प्रधानमंत्री आवास पर करने के बाद दोनों सुरक्षाकर्मियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इस घटना से समूचे हिंदुस्तान में कोहराम मच गया था। वहीँ इंदिरा की हत्या करने वाले सतवंत सिंह को अज्ञात हत्यारों ने गोली मार हत्या की थी तो बेयंत सिंह को तिहार जेल में फांसी की सजा सुनाई गई।

राजीव गांधी (मई 21,1991)
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके पुत्र राजीव गांधी भारी बहुमत के साथ भारत के प्रधानमंत्री बने थे। उसके बाद 1989 के आम चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और पार्टी दो साल तक विपक्ष में रही। 1991 के आम चुनाव में प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक भयंकर बम विस्फोट में राजीव गांधी की मौत हो गई थी। राजीव की हत्या के पीछे श्रीलंका के दुर्दांत संगठन लिट्टे का हाथ था।


बंगलादेश 
जनरल जिया उर रहमानलेफ्टिनेंट जनरल जिया उर रहमान की हत्या उनके की निकट सहयोगी और फौजी कमांडरों द्वारा कर दी गई थी। 30 मई 1981 को चटगांव सर्किट हाउस में जिया उर रहमान को सेना के अधिकारियों के एक समूह ने मौत के घाट उतार दिया था। उनके निजी अंगरक्षक भी योजना का हिस्सा थे। गौरतलब है कि जिया का बंगलादेश में 1977-1981 तक एक तरफ़ा राज चलता था।

शेख मुजीबुर्रहमान
बंगलादेश के पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान को बांग्लादेशी सेना के अधिकारियों के एक दल ने उनके ही निवास पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। 15 अगस्त 1975 को हुई इस घटना में हत्यारों ने मुजीबुर्रहमान के परिवार को भी नहीं बक्शा था और उनके परिवार के सदस्यों को मार डाला। हालांकि रहमान की दो बेटियां शेख हसीना और शेख रेहाना इस हत्याकांड के बीच बच निकली थीं।

श्रीलंका 

एस भंडारनायके
श्रीलंका के चौथे प्रधानमंत्री भंडारनायके की 26 सितम्बर 1959 को एक बौद्ध भिक्षु ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। तल्दुवे सोमाराम नामक यह बौद्ध भिक्षु बौद्ध पादरियों के दल का सदस्य था। बौद्ध भिक्षु जान सुरक्षाकर्मियों ने सोमाराम की सुरक्षा जांच नहीं की जिसके चलते वह अपने साथ एक रिवाल्वर ले जाने में सफल हो गया और मौक़ा पाते ही भंडारनायके की हत्या कर दी।

आर प्रेमदासाश्रीलंका के तीसरे राष्ट्रपति आर प्रेमदासा को एक आत्मघाती हमलावर द्वारा 1 मई, 1993 को बम विस्फोट द्वारा मार दिया गया था। घटना के वक़्त प्रेमदासा मई दिवस की रैली में हिस्सा ले रहे थे।



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